💖 “इंतज़ार के उस पार” — एक प्यार भरी कहानी
शहर के पुराने रेलवे स्टेशन पर हर शाम एक लड़की चुपचाप बैठा करती थी—आर्या।
वह प्लेटफ़ॉर्म की तरफ़ देखती रहती, जैसे कोई अभी आएगा।
लोग कहते, “किसका इंतज़ार करती है?”
वह बस हल्की-सी मुस्कान देती और नज़रें झुका लेती।
उसी स्टेशन पर एक लड़का आया—अयान।
बरसात तेज़ हो गई, वह आर्या के पास आकर बोला,
“छाता शेयर करोगी?”
आर्या ने हिचकते हुए कहा,
“हाँ… पर जगह कम है।”
अयान हँस पड़ा, “दिल में जगह हो, तो छाते में भी हो जाती है।”
दोनों हँस पड़े।
यह पहला पल था जब आर्या ने किसी अजनबी से इतने अपनापन के साथ बात की।
अयान रोज़ उसी समय स्टेशन आता।
कभी चाय लेकर, कभी समोसे, कभी सिर्फ मुस्कान।
“तुम किसका इंतज़ार करती हो?”
एक दिन अयान ने पूछ ही लिया।
आर्या थोड़ी देर चुप रही, फिर बोली—
“कभी बहुत गहरा प्यार किया था… वो वादा करके गया था कि लौटेगा।
लेकिन अब शायद… नहीं आएगा।”
उसकी आँखों में एक लंबा इंतज़ार था—जो थका हुआ भी था और ज़िद्दी भी।
“अगर वो लौट आए, तो क्या तुम मुझे भूल जाओगी?”
आर्या चौंक गई—यह सवाल अयान जैसा नहीं था।
वह धीरे से बोली,
“किसी का इंतज़ार करना और किसी को भूल जाना… दोनों अलग बातें हैं।”
अयान मुस्कुराया,
“और अगर कोई तुम्हारे इंतज़ार में हो?”
आर्या पहली बार उसकी आँखों में देखने लगी।
वहाँ सच्चाई थी, डर था… और एक सीधी-सी मोहब्बत।
कुछ हफ्तों बाद, स्टेशन पर अनाउंसमेंट हुआ—
“कूपन एक्सप्रेस आ रही है…”
यही वो ट्रेन थी जिससे उसके पुराने प्यार को लौटना था—
वह ट्रेन, जिसका वह महीनों से इंतज़ार कर रही थी।
ट्रेन आकर रुक गई।
आर्या की साँसें तेज़ हो गईं।
एक-एक यात्री उतरता गया…
पर वह नहीं आया।
आर्या के कदम धीरे-धीरे थककर पीछे हटने लगे।
तभी उसने देखा—अयान थोड़ी दूर खड़ा,
पलकों पर उम्मीद लिए…
पर बोल कुछ नहीं रहा।
आर्या उसके पास आई।
उसने पहली बार बिना डर, बिना हिचक, उसका हाथ पकड़ लिया।
आर्या बोली—
“जिसका इंतज़ार था… वो शायद कभी लौटना ही नहीं था।
लेकिन जिसने मेरे इंतज़ार को समझा…
वो तुम हो।”
अयान के चेहरे पर ऐसी मुस्कान फैल गई,
जैसे कोई पुरानी सर्दी में पहली धूप उतर आए।
दोनों चल पड़े—स्टेशन से दूर,
पर एक नए रास्ते की तरफ़…
जहाँ इंतज़ार नहीं,
साथ था।


