कहानी चतुर सियार की

Story King

बहुत समय पहले की बात है, एक घना जंगल था, जहाँ हर प्रकार के जानवर रहते थे। शेर, बाघ, हाथी, हिरण, खरगोश, बंदर, और पक्षियों की चहचहाहट से वह जंगल हमेशा जीवंत रहता था। उसी जंगल में एक सियार (गीदड़) भी रहता था — लेकिन यह कोई साधारण सियार नहीं था, बल्कि बहुत ही चतुर, चालाक और बुद्धिमान था। उसकी चतुराई के किस्से पूरे जंगल में मशहूर थे।

यह कहानी उसी चतुर सियार की है — जिसने अपनी बुद्धिमानी और चालाकी से कई बार मुश्किल परिस्थितियों से खुद को निकाला और कई बार जंगल के अन्य जानवरों को भी बचाया।

सियार की मुश्किल

एक बार की बात है, गर्मियों का मौसम था। जंगल सूखा पड़ा था और खाने-पीने की बहुत कमी हो गई थी। चतुर सियार बहुत दिनों से भूखा था। वह इधर-उधर भोजन की तलाश में भटक रहा था, पर उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला।

भूख से बेहाल सियार एक दिन जंगल छोड़कर एक पास के गाँव की ओर निकल पड़ा। गाँव के किनारे एक धोबी का घर था। वहाँ एक बड़ा सा तालाब था जहाँ कपड़े धोए जाते थे। पास में ही एक रंगाई का काम भी होता था।

सियार पानी पीने के लिए तालाब की ओर गया, लेकिन अचानक धोबी के कुत्तों ने उसे देख लिया और उस पर दौड़ पड़े। डर के मारे सियार इधर-उधर भागा और गलती से एक बड़े रंग के टब में गिर गया।

रंगीन सियार

जब सियार रंग के टब से निकला, तो वह पूरी तरह से नीले रंग में रंग चुका था। अब वह एक साधारण सियार नहीं, बल्कि एक विचित्र प्राणी लग रहा था — ऐसा जानवर जिसे जंगल में पहले कभी किसी ने नहीं देखा था।

सियार ने जैसे ही खुद को नीले रंग में देखा, उसके चतुर दिमाग में एक योजना आई। वह सीधा वापस जंगल की ओर भागा। जंगल में पहुँचते ही सब जानवर उसे देखकर चौंक गए।

“ये कौन है?!” सब जानवरों में खलबली मच गई।

नीले रंग का सियार बहुत शांति से बोला, “डरो मत, मैं कोई साधारण जानवर नहीं हूँ। मुझे खुद भगवान ने आकाश से भेजा है। अब से मैं इस जंगल का राजा हूँ और तुम्हें मेरी सेवा करनी होगी।”

जंगल का नया राजा

सियार के अनोखे रंग और आत्मविश्वास से सब जानवर डर गए। उन्होंने सोचा कि शायद यह सचमुच कोई स्वर्ग से आया देवदूत है। सब जानवरों ने उसे ‘राजा’ मान लिया। शेर, बाघ, हाथी जैसे ताकतवर जानवर भी सियार के सामने सिर झुकाने लगे।

सियार अब राजा बन चुका था। वह रोज अच्छे खाने का आदेश देता, सेवा करवाता और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने लगा।

लेकिन उसने एक चालाकी की — उसने अपने जैसे बाकी सियारों को जंगल से बाहर भगा दिया। उसे डर था कि कहीं कोई उसकी असलियत न पहचान ले।

सियार की चतुराई और स्वार्थ

अब सियार के पास सब कुछ था — खाना, सम्मान, सेवा और एक राजा जैसी जिंदगी। वह जानवरों को मूर्ख समझता और मन ही मन उन पर हँसता।

लेकिन समय बीतने के साथ उसकी चतुराई घमंड में बदलने लगी। वह अत्यधिक आदेश देने लगा, जानवरों को बेवजह तंग करने लगा। अब जानवर धीरे-धीरे उससे परेशान होने लगे, लेकिन फिर भी डर के कारण कुछ नहीं कहते।

राज़ का खुलासा

एक दिन की बात है, रात को जंगल में चाँदनी फैली थी और दूर कहीं से सियारों की हूक सुनाई दी — “हुआ… हुआ…”

चतुर सियार की आदत थी कि वह भी कभी-कभी इस आवाज़ पर प्रतिक्रिया देता था। लेकिन अब तक वह खुद को रोकता था। पर उस रात वह खुद को रोक न सका और “हुआ… हुआ…” करके जोर से हूकने लगा।

उसकी आवाज़ सुनकर सब जानवर चौंक गए।

“अरे! यह तो सियार की आवाज़ है!” शेर दहाड़ा।

“यह तो धोखेबाज है!” हाथी ने चिंघाड़ा।

“हमने इसे भगवान समझा और इसने हमें मूर्ख बनाया!” सब जानवरों ने मिलकर उसे पकड़ लिया।

सियार की सजा

अब सियार की असलियत सबके सामने आ चुकी थी। जानवर बहुत नाराज़ थे। उन्होंने मिलकर उसे सजा देने का फैसला किया। लेकिन शेर ने कहा, “हमें इससे सबक लेना चाहिए, लेकिन हमें क्रूर नहीं होना चाहिए।”

तो उन्होंने सियार को जंगल से निकाल दिया और कहा, “तू अब कभी इस जंगल में वापस नहीं आएगा।”

चतुर सियार शर्मिंदा होकर जंगल छोड़कर चला गया।

सीख और संदेश

इस कहानी से हमें कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:

  1. चतुराई अच्छी है, लेकिन उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
  2. धोखा देने वाला कभी न कभी पकड़ा ही जाता है।
  3. घमंड और स्वार्थ हमेशा पतन की ओर ले जाते हैं।
  4. समय आने पर सच्चाई सबके सामने आ ही जाती है।

चतुर सियार की यह कहानी केवल एक मजेदार कथा नहीं, बल्कि जीवन की कई गहरी सच्चाइयों को उजागर करती है। यह बताती है कि चालाकी और बुद्धिमानी को अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए, न कि दूसरों को धोखा देने में।

सियार भले ही कुछ समय के लिए राजा बन गया, लेकिन उसका अंत दुखद हुआ क्योंकि उसने अपनी चतुराई का गलत इस्तेमाल किया।

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