बहुत अच्छा! नीचे चाणक्य नीति (Chanakya Neeti) से कुछ प्रमुख श्लोक दिए गए हैं, उनके साथ उनका सरल हिंदी में अर्थ भी बताया गया है।
🕉️ चाणक्य नीति के प्रमुख श्लोक और उनके अर्थ
🔹 श्लोक 1:
“नास्ति विद्या समं चक्षुः।”
(Nāsti vidyā samaṁ cakṣuḥ)
अर्थ:
ज्ञान से बड़ा कोई नेत्र नहीं है।
👉 यानी, जैसे आँखें शरीर को दिशा देती हैं, वैसे ही ज्ञान जीवन को दिशा देता है।
🔹 श्लोक 2:
“संतोषः परमं सुखम्।”
(Santoṣaḥ paramaṁ sukham)
अर्थ:
संतोष सबसे बड़ा सुख है।
👉 जो व्यक्ति संतुष्ट है, वही सच्चे अर्थ में सुखी है। लालच दुख का कारण है।
🔹 श्लोक 3:
“माता शत्रु पिता वैरी येन बालो न पाठितः।”
अर्थ:
जो माता-पिता अपने बच्चे को शिक्षा नहीं देते, वे उसके शत्रु के समान हैं।
👉 शिक्षा ही बच्चे का भविष्य बनाती है। बिना शिक्षा के जीवन अंधकारमय होता है।
🔹 श्लोक 4:
“धर्मार्थकाममोक्षाणां कारणं राज्यम्।”
अर्थ:
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – इन चारों का कारण एक सुशासनयुक्त राज्य है।
👉 यानी एक अच्छा शासन ही जीवन के चारों पुरुषार्थों को संभव बनाता है।
🔹 श्लोक 5:
“अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।”
अर्थ:
हे लक्ष्मण! मुझे सोने की लंका भी अच्छी नहीं लगती।
माँ और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ होती हैं।
👉 मातृभूमि और माता के लिए त्याग और प्रेम की शिक्षा।
🔹 श्लोक 6:
“अत्यन्तं कोपनीयानि त्यजेद् दोषान्वितानि च।”
अर्थ:
अत्यधिक क्रोध करने वाली और दोषयुक्त बातों को त्याग देना चाहिए।
👉 यानी गुस्सा और बुरे स्वभाव का त्याग करना ही बुद्धिमानी है।
🔹 श्लोक 7:
“विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय।”
अर्थ:
जब विद्या का उपयोग वाद-विवाद के लिए, धन का घमंड के लिए और शक्ति का दूसरों को पीड़ित करने के लिए किया जाए, तो वह विनाश का कारण बनती है।
👉 ज्ञान, धन और शक्ति का सही उपयोग ही सच्चा विकास है।
आप किस विषय में गहराई से जानना चाहेंगे?



