नरक चतुर्दशी (जिसे नरक चौदस, काली चौदस या रूप चौदस भी कहा जाता है) दीपावली महापर्व के दूसरे दिन मनाई जाती है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और इसका गहरा धार्मिक, पौराणिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व है।
यह दिन नरक के भय से मुक्ति, पापों के नाश,
और शरीर व आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है।
🔥 नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व
🌟 1. पौराणिक कथा (Narakasura Vadh Katha)
पौराणिक मान्यता के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने देवताओं, ऋषियों और स्त्रियों को बहुत कष्ट दिए थे। उसने 16,000 कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर का वध किया और उन स्त्रियों को मुक्त कराया।
नरकासुर की मृत्यु कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुई, इसलिए इस दिन को पाप-मुक्ति और विजय का दिन माना जाता है। इसे “असत्य पर सत्य की विजय” के रूप में मनाया जाता है।
🌼 नरक चतुर्दशी के प्रमुख नाम:
| क्षेत्र | नाम |
|---|---|
| उत्तर भारत | नरक चतुर्दशी, रूप चौदस |
| गुजरात-महाराष्ट्र | काली चौदस |
| दक्षिण भारत | दीपावली का मुख्य दिन |
🚿 नरक चतुर्दशी की परंपराएं व विशेष कार्य
1. अभ्यंग स्नान (Abhyang Snan)
- इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन (तेल-चंदन-उड़द) लगाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- इसे “पाप विमोचन स्नान” कहा जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन स्नान से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है।
🔸 यह स्नान बिल्कुल वैसे ही किया जाता है जैसे किसी त्योहार पर गंगास्नान का महत्व होता है।
2. दीपदान
- घर में दीप जलाकर नरकासुर की मृत्यु की खुशी मनाई जाती है।
- घर के द्वार, स्नानगृह और यमराज के नाम का दीपक विशेष रूप से जलाते हैं।
3. रूप चौदस (सौंदर्य पूजा)
- कई स्थानों पर यह दिन रूप-सौंदर्य वृद्धि के लिए मनाया जाता है।
- स्त्रियाँ इस दिन अच्छे वस्त्र पहनती हैं, सुंदरता का विशेष ध्यान रखती हैं, ताकि सौंदर्य बढ़े।
- ऐसा माना जाता है कि इस दिन स्नान और साज-सज्जा करने से रूप और तेज में वृद्धि होती है।
4. तंत्र साधना (काली चौदस)
- कुछ तांत्रिक परंपराओं में यह दिन काली पूजा, तंत्र सिद्धि और ध्यान का भी दिन है।
- विशेष रूप से माता काली की आराधना की जाती है।
📿 नरक चतुर्दशी मंत्र और पूजन विधि
🔸 स्नान मंत्र (स्नान के समय):
नरकासुरवधं च स्मृत्वा स्नानं करिष्ये।
अर्थ: मैं नरकासुर वध की स्मृति में यह स्नान कर रहा हूँ।
🔸 दीपदान मंत्र (यमराज को दीप अर्पित करते समय):
मृत्युनाः पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानं अकालमृत्युनाशनम्॥
🙏 इस दिन क्या करें?
✔ सूर्योदय से पूर्व उबटन लगाकर स्नान करें
✔ नया वस्त्र पहनें
✔ दीप जलाकर यमराज और नरकासुर वध की पूजा करें
✔ घर की सफाई, सुगंध और सौंदर्य का विशेष ध्यान रखें
✔ पाप विमोचन और आरोग्य की कामना करें
❌ क्या न करें?
✖ देर से सोना (इस दिन जल्दी उठना शुभ माना जाता है)
✖ बिना स्नान के भोजन करना
✖ क्रोध, कटु वचन या नकारात्मकता फैलाना



