प्रथम दिन – माँ शैलपुत्री की पूजा

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नवरात्रि का प्रथम दिन बहुत विशेष होता है क्योंकि यह देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की शुरुआत का प्रतीक होता है। नवरात्रि का अर्थ होता है – “नव” यानी नौ और “रात्रि” यानी रातें। इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है।

🔶 प्रथम दिन – माँ शैलपुत्री की पूजा

🌼 देवी का नाम: माँ शैलपुत्री

  • ‘शैल’ का अर्थ है पर्वत, और ‘पुत्री’ का अर्थ है पुत्री।
  • माता शैलपुत्री, राजा हिमालय की पुत्री थीं।
  • इनका वाहन नंदी बैल है।
  • इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है।

🌸 विशेषताएं:

  • यह देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं।
  • यह रूप शिव की अर्धांगिनी (पार्वती) के रूप में भी पूज्य हैं।
  • पूर्व जन्म में यह सती के रूप में जानी गईं, जिन्होंने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया था।
  • अगला जन्म उन्होंने शैलराज हिमालय के घर में लिया और शैलपुत्री कहलाईं।

🔱 पूजा विधि (Puja Vidhi):

  1. कलश स्थापना (घटस्थापना):
    • पहले दिन घर में पूजा स्थल पर कलश की स्थापना की जाती है।
    • मिट्टी के बर्तन में जौ बोए जाते हैं और उस पर कलश स्थापित किया जाता है।
    • कलश में जल, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते, नारियल आदि रखा जाता है।
  2. शुद्धिकरण:
    • पूजा से पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनना चाहिए।
    • पूजा स्थल और मन दोनों को पवित्र करना आवश्यक है।
  3. माँ शैलपुत्री की आराधना:
    • माँ को फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
    • माँ के मंत्र का जाप करें: “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” या “वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
      वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”
  4. आरती करें और माँ से शक्ति, स्वास्थ्य, और समृद्धि की प्रार्थना करें।

🌼 व्रत का महत्व:

  • नवरात्रि के पहले दिन व्रत रखने से आत्म-शुद्धि होती है।
  • साधक को आध्यात्मिक बल मिलता है और वह साधना के लिए तैयार होता है।
  • यह दिन साधना की शुरुआत और आत्म-नियंत्रण की पहली सीढ़ी माना जाता है।

🟡 रंग और भोग:

  • प्रथम दिन का रंग: पीला – यह रंग ऊर्जा और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है।
  • भोग: माँ को घी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे स्वास्थ्य लाभ होता है।

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