प्रबोधिनी एकादशी (Prabodhini Ekadashi)

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प्रबोधिनी एकादशी (Prabodhini Ekadashi) — जिसे देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, या प्रबोधिनी ग्यारस भी कहा जाता है — कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु “योगनिद्रा” से जागते हैं, इसलिए इसे देवों के जागरण का दिन भी कहा जाता है।

  • “प्रबोधिनी” शब्द का अर्थ है — जगाने वाली या सुप्त अवस्था से उठाने वाली
  • माना जाता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी (हरि शयनी एकादशी) के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए “क्षीरोद सागर” में योगनिद्रा में चले जाते हैं (यह समय चातुर्मास कहलाता है)।
  • प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने बाद पुनः जागते हैं।
  • इस दिन से देवताओं के सभी कार्य, विवाह, मांगलिक संस्कार आदि पुनः आरंभ किए जाते हैं।

🗓️ तिथि और समय

  • तिथि: कार्तिक शुक्ल एकादशी
  • प्रबोधिनी एकादशी आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में आती है।
  • यह तिथि भगवान विष्णु के जागरण और देवताओं के उठने का प्रतीक है।

🙏 धार्मिक महत्व

  1. देव जागरण: इस दिन भगवान विष्णु, लक्ष्मी और सभी देवता चार माह की निद्रा से जागते हैं।
  2. मांगलिक कार्यों की शुरुआत: विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ, दान आदि शुभ कार्य इस दिन से दोबारा शुरू होते हैं।
  3. पुण्य फल: कहा गया है कि इस एकादशी का व्रत करने से ब्रह्महत्या जैसे पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
  4. तुलसी विवाह: इसी दिन तुलसी विवाह का आयोजन होता है — जो भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) और तुलसी (देवी वृंदा) का प्रतीकात्मक विवाह है।
  5. मोक्ष प्राप्ति: विष्णुजी के उपासक इस व्रत से मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।

🕉️ व्रत विधि (Puja Vidhi)

  1. एक दिन पूर्व (दशमी): शाम को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  2. एकादशी के दिन:
    • प्रातः स्नान करें, व्रत का संकल्प लें।
    • भगवान विष्णु का पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें।
    • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
    • दिन भर उपवास रखें — निर्जला, फलाहार या केवल जल के साथ।
    • विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें।
  3. रात्रि जागरण (जागरण):
    • भगवान विष्णु के भजन कीर्तन करें।
    • दीपदान करें — यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
  4. द्वादशी के दिन:
    • प्रातः स्नान कर व्रत का पारण करें (भोजन ग्रहण करें)।
    • ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें।

🔱 कथा (कहानी)

एक पौराणिक कथा के अनुसार —
राजा बलि, जो एक पराक्रमी दैत्यराज थे, ने तीनों लोक जीत लिए। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर उनसे दान में तीन पग भूमि मांगी। वामन भगवान ने दो पगों में धरती और आकाश नाप लिया, और तीसरे पग में राजा बलि ने अपना सिर अर्पण कर दिया।
विष्णुजी राजा बलि के सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का राज्य दिया और चार माह तक वहाँ रहने का वचन दिया। उन चार महीनों के बाद, प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु वापस क्षीरसागर लौटते हैं — इसी का प्रतीक यह पर्व है।

🌿 तुलसी विवाह का महत्व

  • प्रबोधिनी एकादशी को तुलसी और शालिग्राम (भगवान विष्णु का प्रतीक) का विवाह कराया जाता है।
  • तुलसी देवी को भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी माना गया है।
  • इस विवाह में सामान्य विवाह जैसी ही सभी रस्में की जाती हैं — मंडप, फेरे, प्रसाद, भजन आदि।
  • तुलसी विवाह के बाद विवाह मुहूर्त फिर से शुरू होते हैं।

💫 विशेष आयोजन

  • पुष्कर मेला (राजस्थान): इस दिन से प्रसिद्ध पुष्कर मेले का शुभारंभ होता है।
  • नासिक और वाराणसी में भी भव्य पूजा, दीपदान और जागरण होते हैं।
  • कई जगहों पर देवउठनी यात्रा, विशाल शोभायात्रा और दीपोत्सव मनाया जाता है।

🌼 प्रबोधिनी एकादशी व्रत का फल

  • यह व्रत हजारों वर्षों के तप के समान फलदायक माना गया है।
  • पापों से मुक्ति, सौभाग्य, स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

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