बहुत बढ़िया! अब मैं आपको चाणक्य नीति में वर्णित “राजनीति (Politics)” से जुड़े प्रमुख श्लोकों का चयन करके उनके सरल हिंदी अर्थ के साथ समझा रहा हूँ।
🏛️ चाणक्य नीति: राजनीति पर आधारित श्लोक और अर्थ
🔹 श्लोक 1:
“सिंहः शिशुर्निपतति स्वप्नकालेऽपि चेत्सिंहत्वमेव तद्वर्जयेत्।”
(सिंह चाहे बच्चा हो या सो रहा हो, वह हमेशा सिंह ही होता है।)
अर्थ:
एक सच्चा शासक या नेता हर स्थिति में अपने स्वभाव, शक्ति और सम्मान को बनाए रखता है – चाहे वह कमजोर अवस्था में क्यों न हो।
👉 राजनीति में आत्मबल और प्रतिष्ठा हमेशा ज़रूरी है।
🔹 श्लोक 2:
“न एकः सुप्ते राष्ट्रे जागर्ति।”
अर्थ:
जब पूरा राष्ट्र सो रहा हो, तब एक व्यक्ति जागकर देश की रक्षा नहीं कर सकता।
👉 राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए सबकी जागरूकता और भागीदारी ज़रूरी है।
🔹 श्लोक 3:
“मूर्खः परिहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।”
अर्थ:
मूर्ख व्यक्ति एक दोपाया जानवर के समान होता है, जो हानि ही पहुँचाता है।
👉 राजनीति में मूर्खों से दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमानी है।
🔹 श्लोक 4:
“गोपनीयं प्रयत्नेन कुर्वीत कार्यसिद्धये।”
अर्थ:
अपने कार्य और योजनाओं को गुप्त रूप से रखें, जब तक वह पूर्ण न हो जाएं।
👉 राजनीति में गोपनीयता (secrecy) सफलता की कुंजी है।
🔹 श्लोक 5:
“राजा कालस्य कारणं न कालः कस्यचित् प्रभुः।”
अर्थ:
राजा ही समय का निर्माण करता है, समय राजा पर हावी नहीं होता।
👉 राजनीति में जो निर्णयकर्ता होता है, वही समय को बदल सकता है।
🔹 श्लोक 6:
“मित्रं प्रपन्नं न त्यजेत्।”
अर्थ:
जो संकट में आपका साथ दे, उसे कभी न त्यागें।
👉 राजनीति में विश्वसनीय मित्रता स्थायित्व और विश्वास का आधार होती है।
🔹 श्लोक 7:
“न चोरराजा मित्रं न च मूर्खः सुहृद्भवेत्।”
अर्थ:
राजनीति में न तो चोर राजा होता है, न मूर्ख कोई सच्चा मित्र हो सकता है।
👉 शासक को ईमानदार और बुद्धिमान होना चाहिए।
🔍 चाणक्य की राजनीति:
- गुप्त योजनाओं,
- बुद्धिमान सलाह,
- मित्र-दुश्मन की पहचान,
- और संकट में निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित थी।
उनकी नीति आज भी राजनेताओं, प्रशासकों, कूटनीतिज्ञों और नेतृत्वकर्ताओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
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