🔶 द्वितीय दिन – माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा
🌼 देवी का नाम: माँ ब्रह्मचारिणी
- “ब्रह्मचारिणी” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:
- ब्रह्म – तपस्या या ज्ञान
- चारिणी – आचरण करने वाली
- यह देवी तपस्या का स्वरूप हैं।
- माँ ब्रह्मचारिणी, माता पार्वती का वह रूप हैं जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या की थी।
🌸 स्वरूप और प्रतीक:
- यह देवी सफेद वस्त्र धारण करती हैं।
- इनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडलु होता है।
- इनका स्वरूप अत्यंत शांत, गंभीर और तेजस्वी होता है।
- यह विवेक, तप, त्याग और प्रेम की प्रतीक हैं।
🛕 पूजा विधि (Puja Vidhi):
- स्नान और शुद्धता:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को साफ करके मां के लिए आसन बनाएं।
- माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- उन्हें पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
- विशेष रूप से सफेद फूल अर्पित करें।
- मंत्र जाप करें: “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” या “दधाना करपद्माभ्यां माला कमण्डलुं शुभाम्।
ब्रह्मचारिणी च शुभदां गौरीं नमाम्यहम्॥” - आरती करें और माँ से तप, धैर्य, और ज्ञान की प्राप्ति हेतु प्रार्थना करें।
🌺 व्रत का महत्व:
- यह दिन साधकों के लिए धैर्य, संयम और तपस्या का प्रतीक है।
- माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से आत्मबल, ब्रह्मचर्य व संयम की प्राप्ति होती है।
- विद्यार्थी और साधक विशेष रूप से इस दिन माँ से ज्ञान और एकाग्रता की कामना करते हैं।
🟡 द्वितीय दिन का रंग और भोग:
- रंग: सफेद – शांति, पवित्रता और साधना का प्रतीक।
- भोग: माँ को चीनी और मिश्री अर्पित करना शुभ होता है। इससे जीवन में मिठास और शीतलता आती है।



