वामन अवतार
- “वामन” शब्द का अर्थ है — छोटा, बौना, या विप्र बालक (ब्राह्मण बालक)।
- भगवान विष्णु ने यह रूप धारण किया था ताकि असुरराज बलि के अहंकार को शांत कर सकें और देवताओं को उनका अधिकार वापस दिला सकें।
📖 वामन अवतार की पृष्ठभूमि (कथा का प्रारंभ)
त्रेता युग के समय, असुरराज राजा बलि (महान दैत्य प्रह्लाद का पौत्र) ने अपने तप, दान और वीरता से तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) पर विजय प्राप्त कर ली थी।
देवता पराजित होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और प्रार्थना की —
“हे प्रभु, असुरराज बलि ने सम्पूर्ण लोकों पर अधिकार कर लिया है, अब हमारे लिए स्थान शेष नहीं रहा।”
भगवान विष्णु ने उन्हें धैर्य दिलाया और कहा कि वे उचित समय पर उपाय करेंगे।
🌼 राजा बलि की कथा
राजा बलि बहुत धर्मात्मा और दानी थे। वे अपने गुरु शुक्राचार्य के मार्गदर्शन में यज्ञ कर रहे थे जिससे उन्हें अमरत्व प्राप्त होने वाला था।
देवताओं ने यह देखकर भय व्यक्त किया कि अगर यह यज्ञ पूर्ण हो गया, तो संसार में अधर्म फैल जाएगा।
🪶 भगवान विष्णु का अवतरण
तब भगवान विष्णु ने ऋषि कश्यप और देवमाता अदिति के यहाँ वामन (बौने ब्राह्मण बालक) के रूप में जन्म लिया।
यह जन्म इसलिए हुआ ताकि वे बलि से बिना युद्ध किए तीनों लोकों का अधिकार देवताओं को लौटा सकें।
👦 वामन का रूप और स्वभाव
- वे एक तेजस्वी, तपस्वी, सुंदर ब्राह्मण बालक के रूप में प्रकट हुए।
- हाथ में छत्र (छाता), कमंडलु (जल पात्र) और कुश घास थी।
- उनके मुख पर दिव्यता झलकती थी और वे अत्यंत विनम्र थे।
🔱 राजा बलि से भिक्षा
वामन ब्राह्मण रूप में राजा बलि के यज्ञ में पहुँचे।
बलि ने उन्हें देखा और आदरपूर्वक कहा —
“हे ब्राह्मण कुमार! मुझे बताइए, मैं आपको क्या दान दूँ?”
तब वामन मुस्कराकर बोले —
“मुझे तो बस तीन पग भूमि चाहिए, जहाँ मैं अपने पाँव रख सकूँ।”
राजा बलि ने हँसते हुए कहा —
“आप इतने छोटे हैं, तीन पग भूमि से क्या करेंगे? आप कुछ बड़ा माँग लीजिए।”
लेकिन वामन ने कहा —
“जो व्यक्ति संतोष नहीं जानता, वह कभी सुखी नहीं होता। मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए।”
राजा बलि ने सहमति दी, परंतु उनके गुरु शुक्राचार्य ने चेताया —
“यह कोई साधारण बालक नहीं है, यह स्वयं विष्णु हैं। इन्हें दान देना उचित नहीं।”
परंतु बलि ने कहा —
“यदि भगवान विष्णु स्वयं मुझसे कुछ माँगने आए हैं, तो मैं मना कैसे करूँ? यही तो मेरे जीवन का सौभाग्य है।”
🌍 वामन का विराट रूप (त्रिविक्रम रूप)
जैसे ही बलि ने दान की प्रतिज्ञा की, वामन ने अपना बौना रूप छोड़कर विराट (विशाल) रूप धारण कर लिया।
वह रूप इतना विशाल था कि—
- पहले पग से उन्होंने पृथ्वी और पाताल लोक नाप लिया।
- दूसरे पग से उन्होंने स्वर्ग लोक और सम्पूर्ण आकाश को ढँक लिया।
अब तीसरे पग के लिए कोई स्थान शेष नहीं था।
🙇♂️ राजा बलि का समर्पण
तब भगवान विष्णु ने कहा —
“अब तीसरा पग कहाँ रखूँ, बलि?”
राजा बलि ने विनम्र होकर अपना सिर झुका दिया और कहा —
“हे प्रभु, अपना तीसरा पग मेरे सिर पर रख दीजिए।”
विष्णुजी ने ऐसा ही किया।
तीसरा पग रखते ही बलि पाताल लोक में भेज दिए गए, परंतु उन्होंने भगवान विष्णु को वचन दिया कि वे वहाँ सदैव उनकी रक्षा करेंगे।
🌺 भगवान की कृपा
भगवान विष्णु बलि की भक्ति, सत्यनिष्ठा और दानशीलता से प्रसन्न हुए। उन्होंने वरदान दिया —
“हे बलि! तुम पाताल लोक के राजा बनो, वहाँ मैं स्वयं तुम्हारा रक्षक बनकर रहूँगा। प्रत्येक वर्ष प्रबोधिनी एकादशी के दिन मैं तुम्हारे यहाँ आता रहूँगा।”
💫 वामन अवतार का संदेश
- अहंकार का दमन: चाहे व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली हो, अहंकार उसे पतन की ओर ले जाता है।
- दान की महिमा: राजा बलि का दान धर्म का सर्वोच्च उदाहरण है — उन्होंने भगवान को स्वयं को अर्पण कर दिया।
- विनम्रता और संतोष: वामन का तीन पग भूमि माँगना सिखाता है कि इच्छाओं को सीमित रखना ही सच्चा सुख है।
- भक्ति और समर्पण: बलि की निष्ठा के कारण ही उन्हें भगवान की सन्निधि प्राप्त हुई।
🕉️ वामन अवतार का प्रतीकात्मक अर्थ
- वामन (छोटा रूप) — विनम्रता और धर्म का प्रतीक
- तीन पग भूमि — तीन लोक (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) या मन, वचन, कर्म पर नियंत्रण का प्रतीक
- राजा बलि — अहंकार, भोग और शक्ति का प्रतीक
- भगवान विष्णु का विराट रूप (त्रिविक्रम) — सत्य और धर्म की सर्वव्यापकता का प्रतीक
📜 शास्त्रीय संदर्भ
वामन अवतार की कथा इन ग्रंथों में वर्णित है:
- श्रीमद् भागवत पुराण (अष्टम स्कंध)
- विष्णु पुराण
- हरिवंश पुराण
- भागवत महापुराण
- रामायण (बालकांड) में भी इसका उल्लेख है।


