माँ चंद्रघंटा की पूजा

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🔶 तृतीय दिन – माँ चंद्रघंटा की पूजा

🌼 देवी का नाम: माँ चंद्रघंटा

  • यह देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं।
  • इनके मस्तक पर अर्धचंद्र (घंटा के आकार का) होता है, इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
  • माँ का यह रूप शक्ति और सौंदर्य का अद्भुत संगम है।

🌸 स्वरूप और प्रतीक:

  • माँ चंद्रघंटा का रंग गोल्डन (सुनहरा) या कभी-कभी गौरवर्ण बताया गया है।
  • यह दस भुजाओं वाली हैं और इनके हर हाथ में शस्त्र हैं – जैसे त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष आदि।
  • इनके माथे पर अर्धचंद्र और स्वरूप अत्यंत प्रचंड और युद्धमूर्ति वाला है।
  • इनका वाहन शेर है, जो वीरता और साहस का प्रतीक है।

🛕 पूजा विधि (Puja Vidhi):

  1. स्नान और शुद्धता:
    • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • पूजा स्थल पर माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
  2. पूजन सामग्री:
    • फूल, धूप, दीप, चंदन, अक्षत, मिठाई, विशेष रूप से केसर या दूध से बना भोग
  3. मंत्र जाप करें: “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः” या “पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
    प्रस्यन्तं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥”
  4. आरती करें और माँ से शांति, साहस और रक्षा की प्रार्थना करें।
    • इस दिन साधक को अपने भीतर के भय, शंका और कमजोरी से मुक्ति की कामना करनी चाहिए।

🌺 व्रत और साधना का महत्व:

  • माँ चंद्रघंटा की पूजा से भीतर का डर समाप्त होता है
  • साधक को अद्भुत साहस, शक्ति और तेज की प्राप्ति होती है।
  • यह रूप बताता है कि एक साधारण स्त्री जब समय आए तो रक्षक और विनाशिनी दोनों बन सकती है।

🟡 तृतीय दिन का रंग और भोग:

  • रंग: लाल या सुनहरा (Golden) – शक्ति, सौंदर्य और पराक्रम का प्रतीक।
  • भोग: माँ को दूध या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। इससे रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति मिलती है।

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