🔶 सप्तम दिन – माँ कालरात्रि की पूजा
🌼 देवी का नाम: माँ कालरात्रि
- माँ दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं – कालरात्रि, जिन्हें भयानक लेकिन कल्याणकारी देवी के रूप में जाना जाता है।
- “काल” यानी समय/मृत्यु, और “रात्रि” यानी रात्रि या अंधकार – अर्थात यह देवी काल और अंधकार का नाश करने वाली हैं।
- यह रूप दर्शाता है कि देवी संकट के समय कितनी विकराल हो सकती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य भक्त की रक्षा करना ही होता है।
🌸 स्वरूप और प्रतीक:
- माँ कालरात्रि का रूप अत्यंत भयानक लेकिन कल्याणकारी है।
- इनका रंग काला/श्यामवर्ण है, बाल बिखरे हुए, और तीन नेत्र हैं जिनसे अग्नि की ज्वाला निकलती है।
- इनकी चार भुजाएं होती हैं:
- दाहिने हाथों में एक में वरमुद्रा, दूसरे में अभयमुद्रा
- बाएं हाथों में लोहे का कांटा (खड्ग) और वज्र
- इनका वाहन गधा (गर्दभ) है।
👉 भले ही इनका स्वरूप उग्र है, लेकिन यह देवी भय और विनाश से मुक्ति दिलाती हैं।
🛕 पूजा विधि (Puja Vidhi):
- स्नान और शुद्धता:
- प्रातः स्नान कर सफेद या नीले वस्त्र पहनें (कुछ परंपराओं में काले वस्त्र भी चलन में हैं)।
- पूजा स्थान पर माँ कालरात्रि का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजन सामग्री:
- नीले/काले फूल, कुमकुम, चंदन, धूप, दीप, गंध, गुड़, नारियल आदि।
- विशेष रूप से गुड़ और हल्दी का भोग अर्पित करें।
- मंत्र जाप करें: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” या “एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलता कण्ठकपाला माला।
कालरात्रिर्भयंकरी सर्वशत्रुनिवारिणी॥” - आरती करें और माँ से भय, शोक, दुर्घटनाओं और बुरी शक्तियों से रक्षा की प्रार्थना करें।
🌺 व्रत और साधना का महत्व:
- माँ कालरात्रि की पूजा से भय, रोग, शत्रु, भूत-प्रेत, काले जादू आदि से मुक्ति मिलती है।
- यह देवी गूढ़ साधनाओं, तंत्र-मंत्र और ध्यान के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती हैं।
- यह रूप बताता है कि भले ही जीवन में अंधकार हो, लेकिन उसके पार भी प्रकाश और कल्याण है।
🟡 सप्तम दिन का रंग और भोग:
- रंग: नीला या काला – रहस्य, शक्ति और गूढ़ ज्ञान का प्रतीक।
- भोग: माँ को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें, या नारियल अर्पित करना शुभ होता है।



