🔶 अष्टम दिन – माँ महागौरी की पूजा
🌼 देवी का नाम: माँ महागौरी
- माँ दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं – महागौरी।
- “महा” = महान, “गौरी” = उज्ज्वल या श्वेत – अर्थात इनका रूप अत्यंत गोरा, शांत, और दिव्य होता है।
- माँ महागौरी पवित्रता, सौंदर्य, करुणा और शांति की प्रतीक हैं।
🌸 स्वरूप और प्रतीक:
- इनका रंग श्वेत (सफेद) होता है, बिल्कुल चंद्रमा की तरह उज्ज्वल।
- यह श्वेत वस्त्र, सफ़ेद आभूषण और श्वेत सवारी (वृषभ – बैल) पर विराजमान होती हैं।
- इनके चार भुजाएं हैं:
- दो हाथों में त्रिशूल और डमरू,
- एक हाथ अभय मुद्रा में और
- एक हाथ वर मुद्रा में होता है।
यह वही रूप है जो माँ पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद प्राप्त किया था, जिससे उनका काला रंग मिट गया और वह महागौरी कहलाईं।
🛕 पूजा विधि (Puja Vidhi):
- स्नान व शुद्धता:
- प्रातः स्नान करके सफेद या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
- माँ महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पूजन सामग्री:
- सफेद फूल, चावल, सफेद मिठाई (खीर, पेड़ा), चंदन, धूप, दीप।
- विशेष रूप से नारियल और काजू-किशमिश अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- मंत्र जाप करें: “ॐ देवी महागौर्यै नमः” या “श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥” - आरती करें और माँ से सुख, सौंदर्य, विवाह, और शांति की कामना करें।
🌺 व्रत और साधना का महत्व:
- माँ महागौरी की पूजा से पापों का नाश, पवित्रता की प्राप्ति, और जीवन में शांति और सौभाग्य आता है।
- कन्या पूजन (कंजक पूजा) विशेष रूप से इसी दिन किया जाता है – 2, 5, 7 या 9 कन्याओं को भोजन कराकर उनका पूजन किया जाता है।
- यह देवी कुमारियों और स्त्रियों की सुरक्षा और शुभता की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।
🟡 अष्टम दिन का रंग और भोग:
- रंग: गुलाबी या सफेद – प्रेम, शांति और कोमलता का प्रतीक।
- भोग: माँ को नारियल, खीर, सूखे मेवे और सफेद मिठाई अर्पित करें।



