विजयादशमी (दशहरा) हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पावन और ऐतिहासिक महत्व वाला त्योहार है, जो अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व “अच्छाई की बुराई पर विजय” का प्रतीक माना जाता है। इसे “विजयादशमी” भी कहते हैं, जिसका अर्थ है “दशमी तिथि पर प्राप्त हुई विजय”। इस दिन दो प्रमुख घटनाओं की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है:
- भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध (रामायण की कथा)
- देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध (शक्ति परंपरा)
🔶 1. विजयादशमी का अर्थ
- विजय का अर्थ है जीत, और
- दशमी का अर्थ है हिंदू पंचांग के अनुसार दसवां दिन।
यह त्योहार नवरात्रि के नौ दिनों के उपरांत दसवें दिन मनाया जाता है, जब देवी दुर्गा या भगवान राम की विजय हुई थी।
🔶 2. विजयादशमी से जुड़ी दो प्रमुख कथाएँ
🏹 (1) श्रीराम और रावण की कथा (रामायण पर आधारित)
- श्रीराम ने अपनी पत्नी सीता माता को लंका के राजा रावण से मुक्त कराने के लिए एक लंबा युद्ध लड़ा।
- रावण दस सिर वाला अत्याचारी राक्षस था, जिसे शक्ति और विद्या का बहुत घमंड था।
- नवरात्रि के नौ दिन श्रीराम ने देवी दुर्गा की आराधना की, शक्ति प्राप्त की और दशमी के दिन रावण का वध किया।
- इस प्रकार दशहरे का दिन “अधर्म पर धर्म की विजय” के रूप में मनाया जाता है।
🗡️ (2) देवी दुर्गा और महिषासुर की कथा
- महिषासुर नामक असुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग लोक पर कब्ज़ा कर लिया।
- तब सभी देवताओं की शक्ति से देवी दुर्गा का जन्म हुआ।
- नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी ने महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया।
- यह दिन “शक्ति की विजय” के रूप में जाना गया, जिसे बंगाल और पूर्व भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है।
🔶 3. दशहरे का प्रतीकात्मक अर्थ
- रावण के दस सिर प्रतीक हैं मनुष्य के दस दोषों के — जैसे क्रोध, काम, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, ईर्ष्या और अज्ञान।
- रावण दहन का अर्थ है इन दोषों का नाश।
- यह पर्व हमें सत्य, संयम, साहस और सेवा की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
🔶 4. विजयादशमी की परंपराएँ
🔸 1. रामलीला और रावण दहन
- उत्तर भारत में दशहरे से पहले रामलीला का मंचन होता है — राम के जीवन की घटनाओं को नाटक रूप में दिखाया जाता है।
- दशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया जाता है।
- यह दृश्य “बुराई के अंत” का प्रतीक होता है।
🔸 2. शस्त्र पूजा (आयुध पूजन)
- दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में इस दिन शस्त्रों और औजारों की पूजा की जाती है।
- यह परंपरा विशेषकर योद्धाओं और सैनिकों में प्रचलित रही है।
🔸 3. विद्या आरंभ / सरस्वती पूजा
- दक्षिण भारत में बच्चे इस दिन पहली बार पढ़ाई शुरू करते हैं — जिसे विद्यारंभ संस्कार कहते हैं।
- विद्यार्थी और कलाकार माँ सरस्वती की पूजा करते हैं।
🔸 4. शमी वृक्ष पूजा
- कुछ स्थानों पर लोग शमी वृक्ष की पूजा करते हैं। महाभारत की कथा के अनुसार पांडवों ने अपने अस्त्र‑शस्त्र शमी वृक्ष में छुपाए थे।
🔶 5. भारत में क्षेत्रीय रूप से दशहरा कैसे मनाया जाता है?
| क्षेत्र | परंपराएँ |
|---|---|
| उत्तर भारत | रामलीला, रावण दहन, मेले |
| पश्चिम बंगाल | दुर्गा पूजा का अंतिम दिन, दुर्गा विसर्जन |
| कर्नाटक (मैसूर) | मैसूर दशहरा — बेहद भव्य आयोजन, हाथियों की शोभायात्रा |
| महाराष्ट्र | अपनों को शमी पत्र (सोना) देना |
| गुजरात | गरबा, डांडिया, देवी आराधना के साथ दशमी का समापन |
| केरल / तमिलनाडु | विद्यारंभ, शास्त्र पूजन, देवी आराधना |
🔶 6. दशहरा के समय किए जाने वाले शुभ कार्य
- नए कार्यों की शुरुआत करना
- शस्त्र पूजा, व्यवसाय के उपकरणों की पूजा
- विद्यार्थियों के लिए अध्ययन आरंभ करना
- जमीन खरीदना, व्यापार शुरू करना
- दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन (पूर्व भारत में)
🔶 7. आध्यात्मिक और नैतिक संदेश
- “सच्चाई की सदा जीत होती है” — सत्य और धर्म भले ही संघर्षपूर्ण हों, पर अंत में जीतते हैं।
- “अहंकार का नाश निश्चित है” — रावण विद्वान और बलशाली था, पर उसका अहंकार उसे ले डूबा।
- “आंतरिक रावण का दहन” — हमें अपने अंदर के दोषों से लड़ना है।
- “संगठित होकर बुराई से लड़ना” — राम और वानर सेना की एकता से रावण हारा।
🔶 8. आधुनिक युग में दशहरा
आज के समय में दशहरा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव का अवसर बन चुका है:
- स्कूलों में नाट्य मंचन, प्रतियोगिताएँ
- रामलीला मैदानों में मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम
- पर्यटन का माध्यम — खासकर मैसूर दशहरा और बंगाल की दुर्गा पूजा
- पर्यावरण‑अनुकूल रावण पुतले, हरे दशहरा आंदोलन
🔶 9. दशहरे से मिलने वाली प्रेरणाएँ
- अपने दोषों को पहचानें और दूर करें।
- कभी अहंकार न करें, चाहे आप कितने भी योग्य हों।
- सत्य, साहस और धैर्य से काम लें।
- संगठित होकर बुराई से लड़ें।
- नए कार्यों को आरंभ करें — विजय का शुभ दिन है।
🔶 10. समापन
विजयादशमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक क्रांति का दिवस है। यह हर इंसान को अपने भीतर की बुराइयों से लड़ने, जीवन में अच्छाई को अपनाने और हर संघर्ष को विजय में बदलने की प्रेरणा देता है।
कुछ चौपाइया
यह रहा विजयादशमी (दशहरा) का विस्तार से वर्णन “चौपाई” (रामचरितमानस की शैली) में, जिसमें भगवान राम की रावण पर विजय, देवी दुर्गा की उपासना, और इस पर्व का महत्व काव्य रूप में प्रस्तुत किया गया है:
🪔 विजयादशमी दशहरा — चौपाई रूप में वर्णन
🌸
नवमी बीती आई दशमी,
मंगलमयी शुभ वेला।
श्रीराम लखन सजि सैन्य संग,
चले रथ बैठ अकेला॥
🌿
रावण लंका महँ अभिमानी,
करे अधर्म की रचना।
सीता हरि बैठि अशोक वन,
दुखित करे वह नचना॥
🔥
श्रीराम जपें नाम भवानी,
नवदुर्गा को ध्यावा।
शक्ति प्राप्त कर धनु उठाकर,
चढ़े रण भूमि सिधावा॥
🛡️
दस दिन लड़े धर्म के साजे,
संग हनुमंत सहायक।
दशमी दिन रघुनंदन जीते,
बिनु भय किये विनायक॥
🌟
रावण मर्दन भयो अपारा,
अधर्म गयो संहारा।
श्रीराम की जयजयकार भई,
छायो धर्म उजियारा॥
🌸
लक्ष्मण, विभीषण, जानकी,
सब पुनि मिले हर्षाय।
दशहरा नाम दिवस भयो,
जन मन करे बड़ाई॥
🪔
शक्ति रूप दुर्गा भी आईं,
महिषासुर मर्दन कीन्हा।
दशमी दिन शांति लई जग में,
दुष्ट समूह संकीन्हा॥
🎆
आजु दिवस शुभ, कार्य सिद्ध,
शस्त्र पूजन विधि नाना।
रामलीला होय नगर‑नगरी,
दहन रावण मझ ध्याना॥
🌿
पुतला दहन प्रतीक बुराई,
क्रोध, काम, लोभ मिठाना।
अंतर बैठा जो रावण,
उसे भगायें समझाना॥
🕊️
दशहरा दिन विजय प्रतीक,
सत्य सदा विजय पावे।
धर्म मार्ग जो चले सदा,
उसको सफलता ध्यावे॥
🪔
जय श्रीराम, जय शक्ति माता,
धर्म रहे यह प्यारा।
सत्य, प्रेम, करुणा से पूरित,
हो जीवन उजियारा॥
सत सत नमन



