धनतेरस

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🪔 धनतेरस की प्रमुख पौराणिक कथा

बहुत समय पहले एक राजा था जिसका नाम हेमराज था। उसके एक पुत्र हुआ जिसकी कुंडली में यह योग था कि उसकी 16वीं वर्ष की आयु में साँप के काटने से मृत्यु हो जाएगी

राजा और रानी इस भविष्यवाणी से बहुत दुखी हुए, लेकिन उन्होंने अपने पुत्र को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी। जब उस राजकुमार की आयु 16 वर्ष होने को आई, तब उन्होंने उसे विवाह हेतु एक स्थान पर भेजा, ताकि दुर्भाग्य से उसका ध्यान हटे और कोई अनहोनी न हो।

जब वह युवक अपने विवाह के पश्चात ससुराल में था, उसी रात यमराज (मृत्यु के देवता) उस युवक की आत्मा लेने के लिए पहुँचे।

लेकिन युवक की नवविवाहिता पत्नी को उस भविष्यवाणी की जानकारी थी। उसने अपने पति को एक कक्ष में बैठा दिया और द्वार को बंद करके बहुत सारे दीपक जलाए, चारों ओर सोने और चांदी के सिक्के रखे, और स्वयं भी द्वार के सामने बैठकर गाना गाने और कहानियाँ सुनाने लगी, ताकि यमराज का ध्यान भटके।

जब यमराज वहाँ पहुँचे, तो दरवाज़े के सामने तेज प्रकाश और संगीत सुनकर ठिठक गए। वह कक्ष में प्रवेश नहीं कर पाए और वहीं बैठकर सारी रात वह संगीत सुनते रहे।

सुबह होने पर यमराज बिना उस युवक की आत्मा लिए ही लौट गए। इस प्रकार उस नवविवाहिता की बुद्धिमत्ता और भक्ति से उसके पति की जान बच गई।


🌟 इसलिए मनाया जाता है धनतेरस

इस घटना की स्मृति में धनतेरस को दीप जलाकर यमराज को प्रसन्न किया जाता है, ताकि अकाल मृत्यु का भय न रहे। इसे “यमदीपदान” भी कहा जाता है।


🌼 अन्य मान्यताएँ

  1. धन्वंतरि जयंती: इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु के अवतार धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। इसलिए इस दिन आरोग्य और आयु की कामना भी की जाती है।
  2. वाणिज्यिक महत्व: इस दिन सोना, चांदी, बर्तन आदि खरीदने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन जो चीज़ खरीदी जाती है, उसमें बरकत होती है।

🙏 धनतेरस पूजन में क्या करें?

  • शाम के समय दीपक जलाएँ (यमराज के लिए एक दीपक मुख्य द्वार पर)
  • धन्वंतरि और कुबेर जी की पूजा करें
  • तांबे/चांदी/सोने के बर्तन खरीदें (या कोई शुभ वस्तु)
  • तुलसी और दीपक से घर की शोभा बढ़ाएँ


🪔 धनतेरस पूजन विधि (Dhanteras Pujan Vidhi)

🔹 पूजन का समय:

  • शाम के समय, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पूजन करना शुभ माना जाता है।

पूजन सामग्री (Samagri):

  • एक मिट्टी या पीतल का दीपक
  • तिल का तेल (या घी)
  • रूई की बाती
  • चावल (अक्षत)
  • हल्दी, कुमकुम
  • फूल, पान, सुपारी
  • धूप, अगरबत्ती
  • गंगाजल या शुद्ध जल
  • मिठाई, फल
  • नया बर्तन (तांबे, पीतल या चांदी का)
  • धन्वंतरि और यमराज का चित्र या प्रतीकात्मक पूजन

🪔 पूजन विधि (Steps):

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजन स्थान को साफ़ करके वहाँ चौकी बिछाएँ और उस पर लाल कपड़ा बिछाएँ।
  3. भगवान धन्वंतरि, कुबेर, माता लक्ष्मी और यमराज का चित्र या प्रतीक रखें।
  4. उनके आगे दीपक जलाएँ और फूल, अक्षत, हल्दी-कुमकुम अर्पित करें।
  5. मिठाई और फल अर्पित करें।
  6. धन्वंतरि मंत्र और यमराज मंत्र का जाप करें (नीचे दिए गए हैं)।
  7. घर के मुख्य द्वार पर एक दीपक यमराज के नाम का जलाकर रखें, जिसे “यमदीपदान” कहा जाता है।

📿 महत्वपूर्ण मंत्र (Mantras)

🙏 1. धन्वंतरि मंत्र (आरोग्य के लिए):

ॐ धन्वंतरये नमः।

या

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शं योरभि स्रवन्तु न:।
ॐ धन्वंतरये नमः।

अर्थ: हे धन्वंतरि देव! हमें आरोग्य, शक्ति और दीर्घायु प्रदान करें।


🙏 2. यमराज मंत्र (अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु):

ॐ यमाय नमः।

या

मृत्युनाः पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानं अकालमृत्युनाशनम्॥

अर्थ: त्रयोदशी के दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।


🙏 3. श्री कुबेर मंत्र (धन-संपत्ति हेतु):

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधन्याधिपतये
धनधन्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

🪔 ध्यान रखें:

  • इस दिन कुछ लोग झाड़ू, बर्तन या धातु (सोना-चांदी) खरीदते हैं।
  • इसे शुभ निवेश माना जाता है, जिससे वर्षभर लक्ष्मी का वास होता है।
  • दीपावली की साफ-सफाई इसी दिन तक पूरी कर लेना शुभ होता है।

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