🌼 सरल भाषा में बच्चों के लिए कहानी: “चतुर खरगोश और शेर” 🌼
बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल में एक बड़ा शेर रहता था। वह बहुत ही ज़्यादा लालची और गुस्सैल था। रोज़ एक जानवर को पकड़कर खा जाता था। सभी जानवर बहुत डरते थे।
एक दिन सब जानवर इकट्ठा हुए और बोले,
“शेर राजा, हम रोज़ मारे जाते हैं। कृपया आप हर दिन एक जानवर को बुला लीजिए, वही आपके पास आएगा। बाकी सब बच जाएंगे।”
शेर ने सोचा, “अरे वाह! मुझे मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी!”
उसने मान लिया।
अब रोज़ एक जानवर शेर के पास जाता और वह उसे खा जाता।
एक दिन एक छोटा सा खरगोश बारी पर आया। उसका नाम था चिंकी। वह बहुत ही समझदार था।
उसने सोचा, “अगर मैं सीधा शेर के पास गया तो मारा जाऊँगा। कुछ तो करना होगा!”
उसने एक चालाक योजना बनाई।
वह शेर के पास देर से पहुँचा। शेर बहुत गुस्सा हुआ।
खरगोश बोला, “राजा जी, माफ कीजिए। रास्ते में एक और शेर मिला। उसने कहा कि वह असली जंगल का राजा है। उसने मुझे रोका और पाँच खरगोशों को खा गया!”
शेर ज़ोर से दहाड़ा, “कहाँ है वो शेर? मुझे दिखाओ!”
चिंकी उसे पास के एक तालाब पर ले गया और बोला,
“राजा जी, देखिए वो रहा शेर – पानी में!”
शेर ने पानी में देखा – और वहाँ अपनी ही परछाई (shadow) दिखी।
वह बोला, “तू मुझे घूर रहा है!”
और गुस्से में तालाब में कूद गया।
लेकिन शेर तैरना नहीं जानता था। वह डूब गया।
चिंकी खुशी-खुशी जंगल लौटा। सब जानवर बहुत खुश हुए।
उन्होंने कहा, “चिंकी ज़िंदाबाद!”
कहानी से सीख:
- समझदारी ताकत से बड़ी होती है।
- घमंड करने वाले का अंत होता है।
- डर से नहीं, दिमाग से काम लो।
🎭 नाट्य रूपांतरण (Play Script): “चतुर खरगोश और शेर” 🎭
पात्र:
- कथावाचक (Narrator)
- शेर (भीम)
- खरगोश (चिंकी)
- हिरण
- लोमड़ी
- जानवरों का समूह
दृश्य 1: जंगल में डर
कथावाचक:
बहुत समय पहले एक जंगल में शेर भीम रहता था। वह रोज़ एक जानवर को खा जाता। सारे जानवर डरते थे।
हिरण (डरते हुए):
अगर हम कुछ नहीं करेंगे, तो हम सब एक-एक करके मारे जाएंगे।
लोमड़ी:
चलिए शेर के पास चलते हैं। एक योजना है।
दृश्य 2: शेर के दरबार में
शेर:
क्यों आए हो सब?
लोमड़ी:
हे राजन, कृपया रोज़ शिकार पर मत जाइए। हम रोज़ एक जानवर खुद भेज देंगे।
शेर (गुर्राते हुए):
ठीक है! लेकिन देर नहीं होनी चाहिए!
दृश्य 3: खरगोश की बारी
कथावाचक:
अब बारी थी चिंकी खरगोश की। वह बहुत चालाक था।
चिंकी (सोचते हुए):
अगर मैं सीधा गया, तो मर जाऊँगा। चलो दिमाग से काम लेते हैं।
दृश्य 4: शेर के सामने चिंकी
शेर (गुस्से में):
इतनी देर क्यों हुई?
चिंकी:
राजा जी, रास्ते में एक और शेर मिला। उसने कहा, ‘अब मैं जंगल का राजा हूँ!’
शेर (दहाड़ते हुए):
कहाँ है वो? मुझे अभी दिखाओ!
दृश्य 5: तालाब के पास
चिंकी:
राजा जी, वह तालाब में रहता है। देखिए, वह रहा!
शेर (तालाब में देखकर):
ये तो मुझे घूर रहा है! मैं इसे सबक सिखाऊँगा!
कथावाचक:
शेर तालाब में कूद गया… और डूब गया।
दृश्य 6: जंगल में खुशी
जानवर (खुश होकर):
शेर मारा गया! चिंकी ने हमें बचा लिया!
चिंकी:
अगर हम सब मिलकर सोचें, तो किसी भी खतरे को हरा सकते हैं!
अंतिम संवाद:
कथावाचक:
इस तरह एक छोटा सा खरगोश जंगल को शेर के डर से आज़ाद कर पाया।
कहानी हमें सिखाती है –
“अक्ल बल से बड़ी होती है।”



