History of Maharashtra महाराष्ट्र का इतिहास

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महाराष्ट्र का इतिहास (History of Maharashtra) – विस्तार से:

महाराष्ट्र का इतिहास अत्यंत समृद्ध, गौरवशाली और विविधतापूर्ण है। यह भूमि प्राचीन सभ्यताओं, शक्तिशाली राजवंशों, संत परंपराओं, वीरता, और सामाजिक जागरूकता का केंद्र रही है।

🏛️ 1. प्राचीन काल:

वैदिक युग और जनपद काल:

  • महाराष्ट्र का उल्लेख ऋग्वेद और अन्य वेदों में मिलता है।
  • यह क्षेत्र दक्षिणापथ कहलाता था और कई आर्य जनजातियाँ यहाँ बसी थीं।
  • अशोक के शिलालेख यहाँ पाए गए हैं, जिससे ज्ञात होता है कि यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य का भाग था।

सातवाहन वंश (230 ईसा पूर्व – 225 ईस्वी):

  • सातवाहन वंश महाराष्ट्र का पहला प्रसिद्ध राजवंश था।
  • गौतमिपुत्र सातकर्णि सबसे प्रसिद्ध राजा थे।
  • इस काल में व्यापार, कला और साहित्य खूब फले-फूले।

🕌 2. मध्यकालीन इतिहास:

वाकाटक वंश (3rd – 5th शताब्दी):

  • अजंता की प्रसिद्ध गुफाओं का निर्माण इसी काल में हुआ।
  • ब्राह्मण धर्म और संस्कृत साहित्य को प्रोत्साहन मिला।

चालुक्य, राष्ट्रकूट और यादव वंश (6th – 13th शताब्दी):

  • राष्ट्रकूटों के शासक अमोघवर्ष और चालुक्यों के विक्रमादित्य जैसे राजाओं ने महाराष्ट्र में शासन किया।
  • एलीफेंटा और एलोरा की गुफाएँ, शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण हैं।

इस्लामी शासन (13वीं – 17वीं सदी):

  • दिल्ली सल्तनत और फिर बहमनी सुल्तानों ने शासन किया।
  • बीजापुर और अहमदनगर जैसे सुल्तानतों का उदय हुआ।

🛡️ 3. मराठा साम्राज्य का उदय (17वीं सदी):

छत्रपति शिवाजी महाराज (1630–1680):

  • शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की स्थापना की और मुगलों तथा सुल्तानों के खिलाफ स्वतंत्रता की नींव रखी।
  • उन्होंने गुरिल्ला युद्धनीति, किलों की शृंखला (जैसे रायगढ़, प्रतापगढ़), और धर्मनिरपेक्ष प्रशासन की स्थापना की।
  • रायगढ़ किला उनकी राजधानी बना।

पेशवा शासन (1707–1818):

  • शिवाजी के बाद पेशवाओं (प्रधानमंत्रियों) ने शासन संभाला।
  • पेशवाओं का केंद्र पुणे बना।
  • इस काल में मराठा साम्राज्य उत्तर में दिल्ली तक फैल गया।

⚔️ 4. ब्रिटिश काल (1818–1947):

तीसरी एंग्लो-मराठा युद्ध (1818) के बाद ब्रिटिशों ने मराठा साम्राज्य को हराकर महाराष्ट्र पर नियंत्रण कर लिया।

ब्रिटिश शासन के दौरान:

  • महाराष्ट्र में सामाजिक सुधार आंदोलन शुरू हुए –
    • महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, गोपाळ गणेश आगरकर, लोकहितवादी तिलक, आदि ने समाज सुधार कार्य किए।
  • बाल गंगाधर तिलक – “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा दिया।
  • डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर – दलितों के अधिकारों के लिए आंदोलन, संविधान निर्माण में योगदान।

5. स्वतंत्रता के बाद का इतिहास:

बॉम्बे राज्य का निर्माण (1950):

  • आज के महाराष्ट्र और गुजरात को मिलाकर बॉम्बे राज्य बनाया गया।● महाराष्ट्र राज्य का गठन (1 मई 1960):
  • संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बाद भाषाई आधार पर महाराष्ट्र और गुजरात को अलग कर दिया गया।
  • 1 मई को महाराष्ट्र की स्थापना हुई – इसे “महाराष्ट्र दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

📌 संक्षेप में महाराष्ट्र के इतिहास की विशेषताएँ:

युगविशेषताएँ
प्राचीनसातवाहन, वाकाटक, अजंता-एलोरा
मध्यकालचालुक्य, यादव, इस्लामी सुल्तानतें
मराठा युगछत्रपति शिवाजी महाराज, पेशवा शासन
ब्रिटिश युगसमाज सुधार, स्वतंत्रता संग्राम
स्वतंत्रता के बाद1960 में महाराष्ट्र राज्य की स्थापना

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